Raghupati Raghav Ram dhun bhajan

कैसे गांधी ने एक श्लोक और एक भजन को बदला देखें…….
भारत में महाभारत का एक श्लोक अधूरा  पढाया जाता है क्यों ??

शायद गांधी की वजह से।

“अहिंसा परमो धर्मः”

जबकि पूर्ण श्लोक इस तरह से है:-
“अहिंसा परमो धर्मः,

धर्महिंसा तदैव च l”
अर्थात – अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है

और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है..🕉
गांधी ने सिर्फ इस ☝श्लोक को ही नही बल्कि उसके अलावा उसने एक प्रसिद्ध भजन को भी बदल दिया… 
-‘रघुपति राघव राजा राम’ इस प्रसिद्ध-भजन का नाम है.

.”राम-धुन” .

जो कि बेहद लोकप्रिय भजन था.. गाँधी ने इसमें परिवर्तन करते हुए

 अल्लाह 

शब्द जोड़ दिया..
असली भजन और गाँधी द्वारा किया गया परिवर्तन..👇🏽
गाँधी का भजन:
रघुपति राघव राजाराम,

पतित पावन सीताराम

सीताराम सीताराम,

भज प्यारे तू सीताराम

ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,

सब को सन्मति दे भगवान…
बड़े-बड़े पंडित तथा वक्ता भी  सब जगह गाँधी द्वारा बदलाव किया हुवा भजन गाते हैं……

यहां तक कि मंदिरो में भी…..!!

उन्हें रोके कौन?

असली राम धुन भजन…👇🏽

 

रघुपति राघव राजाराम

पतित पावन सीताराम

सुंदर विग्रह मेघश्याम

गंगा तुलसी शालग्राम

भद्रगिरीश्वर सीताराम

भगत-जनप्रिय सीताराम

जानकीरमणा सीताराम

जयजय राघव सीताराम
 ‘श्रीराम को सुमिरन’

करने के इस भजन को जिन्होंने बनाया था उनका नाम था लक्ष्मणाचार्य..!

ये भजन 

“श्री नमः रामनामायनम” 

नामक हिन्दू-ग्रन्थ से लिया गयाहै 
शेयर करें ताकि लोग जागरूक हो सकें…!

धन्यवाद 🙏🙏🙏

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